Wednesday, 24 April 2019

जीवन का आधार

प्रेम ही सत्य है
प्रेम ही शाश्वत है
प्रेम ही जीवन का आधार है
प्रेम ही जगत का सार है।
प्रेम बिन भूमि बंजर
चहुँदिश पतझड़ के मंजर।
होकर अंधे स्वार्थ में
प्रेम से क्यों भागे
क्यों तोड़े प्रेम के धागे।
पीकर प्रेम का जाम
मीराँ ने पाये श्याम।
प्रेम से प्राणों में स्पंदन
पल में हरता क्रंदन।
साधु संत सब करते
ढ़ाई आखर प्रेम की बातें
पाकर भक्ति की सौगातें।
जिसने समझा इस भेद को
उसने जी लिया वेद को।
प्रभु भी प्रेम के भूखे
खा लेते रूखे-सूखे
प्रेम के वश में भगवान
चाहे मान या मत मान।
जो समझ गया प्रेम का अर्थ
नहीं गया उसका जीवन व्यर्थ।

शकुन्तला अग्रवाल 'शकुन'
भीलवाड़ा राज.

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