Thursday, 25 April 2019

दोहे - 26 04 2019 1

सांप नेवला साथ में,
अचरज की है बात।
दोनों मिलकर  कर रहे,
जनता पर संघात।।

गयी छेड़ उनकी नजर,
जब साँसों के तार।
मनमोहक लगने लगा,
मुझको ये संसार।।

मेरी चूनर पर चढ़ा,
जबसे रंग पलास।
जीवन में मेरे बसा,
तबसे ही मधुमास।।

कानन-कानन ढूँढता,
कस्तूरी, मृग रोज।
जब उर में झाँके नहीं,
क्यों हो पूरण खोज?

शकुन्तला अग्रवाल 'शकुन'
भीलवाड़ा राज.

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