घुसता माथ अनंग जब, बहके विश्वामित्र।
छूट गया वैराग्य अब, लगती बात विचित्र।।
पापों का मर्दन हुआ, छाया तब मधुमास।
मनवा गिरधर संग में, लगा रचाने रास।।
दुर्लभ मनु जीवन मिला, मत खोना बेकार।
करना ऐसे काज तुम, याद रखे संसार।।
परम सत्य है मौत तो, मत घबराना यार।
लुटा सके जितना लुटा, जीवन भर तू प्यार।।
डर-डर कर जीना नहीं, चाहे आये मौत।
जो डरता, मरता वही, जीवन बनता सौत।।
रिश्ते नाते सब यहीं, रह जाएंगे मीत।
उसका जीवन तर गया,गाता शिव के गीत।।
शकुन्तला अग्रवाल 'शकुन'
भीलवाड़ा राज.
छूट गया वैराग्य अब, लगती बात विचित्र।।
पापों का मर्दन हुआ, छाया तब मधुमास।
मनवा गिरधर संग में, लगा रचाने रास।।
दुर्लभ मनु जीवन मिला, मत खोना बेकार।
करना ऐसे काज तुम, याद रखे संसार।।
परम सत्य है मौत तो, मत घबराना यार।
लुटा सके जितना लुटा, जीवन भर तू प्यार।।
डर-डर कर जीना नहीं, चाहे आये मौत।
जो डरता, मरता वही, जीवन बनता सौत।।
रिश्ते नाते सब यहीं, रह जाएंगे मीत।
उसका जीवन तर गया,गाता शिव के गीत।।
शकुन्तला अग्रवाल 'शकुन'
भीलवाड़ा राज.
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