धड़कन से धड़कन कहे,मत होना नाराज।
कैसे तेरे बिन बजे, अब साँसों के साज?
साँसों की सरगम कहे,खूब लुटाओ प्रीत।
महक उठेगी जिंदगी,पाकर अब मनमीत।।
भौतिकता ने कर दिया,जज्बातों का खून।
कैसे जीवन में खिले,बतला प्रेम प्रसून।।
नहीं करे कोई यहाँ,धड़कन का व्यापार।
सौदागर जो मौत का,कोसेगा संसार।।
सहमी- सहमी जिंदगी,सिसक रहे जज़्बात।
करे कौन परवाह अब,करे कौन अब बात?
जमावड़ा आतंक का,गली-गली में आज।
जबसे दुनिया में हुआ,दुर्योधन का राज।।
शकुन्तला अग्रवाल 'शकुन'
भीलवाड़ा राज.
कैसे तेरे बिन बजे, अब साँसों के साज?
साँसों की सरगम कहे,खूब लुटाओ प्रीत।
महक उठेगी जिंदगी,पाकर अब मनमीत।।
भौतिकता ने कर दिया,जज्बातों का खून।
कैसे जीवन में खिले,बतला प्रेम प्रसून।।
नहीं करे कोई यहाँ,धड़कन का व्यापार।
सौदागर जो मौत का,कोसेगा संसार।।
सहमी- सहमी जिंदगी,सिसक रहे जज़्बात।
करे कौन परवाह अब,करे कौन अब बात?
जमावड़ा आतंक का,गली-गली में आज।
जबसे दुनिया में हुआ,दुर्योधन का राज।।
शकुन्तला अग्रवाल 'शकुन'
भीलवाड़ा राज.
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