Tuesday, 18 June 2019

मनहरण घनाक्षरी

पावनमय प्रीत से
  मधुरिम संगीत से
    सुगंध भरे गीत से
       गेह महकाइये।

  बहती  रसधार  हो
   सबके प्रति प्यार हो
    सुखमय संसार हो
       खुशियाँ लुटाइये।

मर्यादा को धार कर
  खुदगर्जी  पार कर
   अहम् पुचकार कर
     कर्तव्य निभाइये।

मन  में  ईमान  रख
 बुजुर्गों का मान रख
   स्वयं का सम्मान रख
       जीवन सजाइये।

12/5/2019

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