मनहरण घनाक्षरी
पावनमय प्रीत से
मधुरिम संगीत से
सुगंध भरे गीत से
गेह महकाइये।
बहती रसधार हो
सबके प्रति प्यार हो
सुखमय संसार हो
खुशियाँ लुटाइये।
मर्यादा को धार कर
खुदगर्जी पार कर
अहम् पुचकार कर
कर्तव्य निभाइये।
मन में ईमान रख
बुजुर्गों का मान रख
स्वयं का सम्मान रख
जीवन सजाइये।
12/5/2019
पावनमय प्रीत से
मधुरिम संगीत से
सुगंध भरे गीत से
गेह महकाइये।
बहती रसधार हो
सबके प्रति प्यार हो
सुखमय संसार हो
खुशियाँ लुटाइये।
मर्यादा को धार कर
खुदगर्जी पार कर
अहम् पुचकार कर
कर्तव्य निभाइये।
मन में ईमान रख
बुजुर्गों का मान रख
स्वयं का सम्मान रख
जीवन सजाइये।
12/5/2019
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