तुम ही बताओ
प्रिये!तुम ही बतलाओ
कैसे तुम्हें मनाऊँ?
गहन-निशा जब भर लेती है
आलिंगन में जग को,
विरह तभी जलाता प्रिये!
मेरे तन-मन को।
प्रिये!तुम्हीं बतलाओ
कैसे पास तुम्हें बुलाऊँ?
तृप्त करने को तपती वसुधा
होड़ मची मेघों में ।
बनकर हरजाई तुमने-
जुदाई - रेखा खींची क्यों?
प्रिये!तुम्ही बतलाओ
दिल का किसको हाल दिखाऊँ?
कली-कली जब शलभ मँडराते
मुझपे ढहाते जुल्म-कहर
तब काँटों की सेज पर बीते
रोजाना मेरा हर पहर।
प्रिये!तुम्हीं बतलाओ
कैसे तुम्हें रिझाऊँ?
सर्वस्व तुम पर मैंने लुटाया
फिर क्यों तूने गरल पिलाया?
प्रिये!तुम्हीं बताओ
कैसे तुम्हें बुलाऊँ?
नहीं ,समझ आता है,मेरी-
कैसे तुम्हें मनाऊँ?
2/7/2019
प्रिये!तुम ही बतलाओ
कैसे तुम्हें मनाऊँ?
गहन-निशा जब भर लेती है
आलिंगन में जग को,
विरह तभी जलाता प्रिये!
मेरे तन-मन को।
प्रिये!तुम्हीं बतलाओ
कैसे पास तुम्हें बुलाऊँ?
तृप्त करने को तपती वसुधा
होड़ मची मेघों में ।
बनकर हरजाई तुमने-
जुदाई - रेखा खींची क्यों?
प्रिये!तुम्ही बतलाओ
दिल का किसको हाल दिखाऊँ?
कली-कली जब शलभ मँडराते
मुझपे ढहाते जुल्म-कहर
तब काँटों की सेज पर बीते
रोजाना मेरा हर पहर।
प्रिये!तुम्हीं बतलाओ
कैसे तुम्हें रिझाऊँ?
सर्वस्व तुम पर मैंने लुटाया
फिर क्यों तूने गरल पिलाया?
प्रिये!तुम्हीं बताओ
कैसे तुम्हें बुलाऊँ?
नहीं ,समझ आता है,मेरी-
कैसे तुम्हें मनाऊँ?
2/7/2019